Saturday, 16 July 2016

अमरनाथ यात्रा





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अमरनाथ यात्रा वृत्तान्त शुरू करने से पहले कुछ आवश्यक जानकारी जरूरी है। कुछ मित्रों का आग्रह था कि मैं ये जानकारियां भी यहाँ लिख दूं।



रास्ता


वैसे तो आप आगे पढेंगे तो सारी जानकारी विस्तार से इन्टरनेट आदि पर मिल जायेगी, लेकिन फिर भी संक्षिप्त में बताता हूँ।

अमरनाथ यात्रा पहलगाम से शुरू होती है। पहलगाम सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है और जम्मू से बनिहाल बस से पहुंचकर बनिहाल से ट्रेन से अनंतनाग पहुंचकर अनंतनाग से टैक्सी आदि मिल जाती है पहलगाम के लिए।

पहलगाम से चन्दनवाडी 16 किलोमीटर सडक मार्ग

चन्दनवाडी से शेषनाग झील 16 किलोमीटर पैदल

शेषनाग झील से महागुनस दर्रा 4 किलोमीटर पैदल

महागुनस दर्रे से पंचतरणी 6 किलोमीटर पैदल

पंचतरणी से अमरनाथ गुफा 6 किलोमीटर पैदल

अमरनाथ गुफा से बालटाल 16 किलोमीटर पैदल



यात्रा के लिये आवश्यक सामान



यात्रा चूंकि उच्च हिमालयी रास्तों पर पैदल की जाती है, जहां हवा का दबाव भी काफी कम रहता है। इसलिये सबसे पहली बात कि सांस, हृदय और ब्लड प्रेसर के रोगी यात्रा न करें। यात्रा के ये रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है तो अपने क्षेत्र से करवाकर जाएँ या फिर जम्मू में और श्रीनगर में भी यह नौगाम और पन्था चौक पर होता है। यात्रा मानसून में होती है, इसलिये बारिश और बर्फबारी के लिये तैयार रहें। सामान कम से कम ले जायें, लेकिन पर्याप्त सामान ले जायें। पर्याप्त जोडी गर्म कपडे, एक कम्बल, रेनकोट, मंकी कैप, दस्ताने, मोटी जुराबें, जूते आवश्यक हैं। बर्फ में धूप के नुकसान से बचने के लिये धूप का चश्मा ले जायें। कोल्ड क्रीम भी ले लें और रोज यात्रा शुरू करने से पहले शरीर के नंगे हिस्सों जैसे हथेली, चेहरे, गर्दन पर अच्छी तरह पोत लें, नहीं तो त्वचा जल जायेगी। एक डण्डा भी जरूरी है। अगर वाकिंग स्टिक ले जायें तो अति उत्तम। वाकिंग स्टिक मजबूत तो होती ही है, इसे बैग में भी रखा जा सकता है। वैसे डण्डे पहलगाम और बालटाल में भी मिल जाते हैं, लेकिन ये उस समय तक टूटने लगते हैं, जब इनकी सर्वाधिक आवश्यकता होती है, यानी शेषनाग झील तथा गुफा के बीच में बर्फ पर चलते समय। मैं वैसे तो दवाई नहीं ले जाता, लेकिन कुछ दवाईयां भी ले लेनी चाहिये। सर्दी-जुकाम, बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, चक्कर आना; ये कुछ प्रमुख बीमारियां हैं जो यात्रा के समय लग जाती हैं। इनके लिये जो भी अच्छी दवाईयां होती हैं, ले जायें। पैदल चलते समय टॉफी ठीक रहती है, इससे मुंह में आर्द्रता बनी रहती है, गला सूखने नहीं पाता। पानी की बोतल भी आवश्यक है, हालांकि स्थान स्थान पर पानी के स्त्रोत मिलते रहते हैं। खाने की कोई परेशानी नहीं है। रास्ते भर भण्डारे मिलते हैं। सोने की भी कोई परेशानी नहीं। पहलगाम, शेषनाग, पंचतरणी, गुफा और बालटाल में भारी संख्या में टेण्ट होते हैं।



यात्रा से पहले के आवश्यक काम


जैसा की बाबा अमरनाथ जी जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरुरी होता है और हम दिल्ली से अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाकर गए थे इसलिए खांडे अंकल ने पहले ही पन्था चौक के SHO अयूब खान को पहले ही फोन कर दिया था के हम लोग उनकी सेवा लेने के लिए उनके पास जायेंगे। 2 जुलाई को करीब 10 बजे हम पन्था चौक पुलिस थाने पहुंचे तो वहाँ SHO साहब नहीं थे तो उनको फ़ोन किया और अंकल का परिचय देते हुए बात करी तो उन्होंने कहा के आप थोड़ा इन्तजार करो मुझे आधा घंटा लगेगा करीब पौने घंटे बाद वो आये और अपने कमरे में स्पेशल चाय मंगवाई फिर थोड़ी बात चीत के बाद अपना एक सिपाही हमारे साथ भेज दिया हम चारों के रजिस्ट्रेशन के लिये हमने अपने कागज और फोटो सिपाही को दे दिए करीब 20 मिनट में उसने हमारा मेडिकल करवा दिया और 20-25 मिनट बाद ही वह खुद जाकर हमारा रजिस्ट्रेशन करवा लाया जो 5 जुलाई 2015 का था पहलगाम के रास्ते से हमे चाहिए भी पहलगाम के रास्ते से था। क्योंकि कहते है पहली यात्रा इसी रास्ते से करनी चाहिए और इधर से ट्रैकिंग का मज़ा भी ज्यादा आता है। बाबा बर्फानी के दर्शन करने का प्रपत्र हाथ में देखकर बहुत अच्छा लग रहा था।











img_20160318_101439_414मेरा रजिस्ट्रेशन



हमने अपनी खुशी से सिपाही को 300 रु दे दिए और फिर उसके साथ थाने में गए SHO साहब का धन्यवाद करने उनको भी हमसे मिलकर बहुत अच्छा लगा फिर पन्था चौक से हमने बस पकडी तभी अंकित बोला के लगता है अब बाबा दर्शन जरूर हो जायेंगे। उसको लगता नहीं था के रेजिस्ट्रेशन हो जायेगा। मैंने कहा भाई चिंता मत कर बाबा के दर्शन जरूर होंगे। करीब 2:30 बजे हम घर पहुँच गए खाना पीना खाया फिर रजिस्ट्रेशन ऑन्टी को दिखाया और कहा के ऑन्टी आप भी चलो तो वो बोली अब क्या रजिस्ट्रेशन करवाने से पहले पूछना था। पूरा दिन निकल गया ऐसी हंसी मजाक में।








12 comments:

  1. kya baat hai bhaisahab................

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  2. बहुत काम आने वाली जानकारी दी है जी आपने।

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  3. धन्यवाद यश जी

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  4. My brother's Nd all dears how was " shankra-acharya- Amrnaat yaTaRa ..now it's start with most welcome in Kashmir..I respect all Lords Nd Amrnaat holy cave also ...bcoz I know what is religious even ny religious..I do respect frm heart ..u ppl go as well Nd come as well ...but Kashmiri ppl love all indian ppl live lovably each other...Ur God wil not ask u there ..did u get peace with us....I am Kashmiri..MHIR KHAN

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  5. मैं हर उस व्यक्ति दिल से इज्जत करता हूँ जो इस देश को अपना मानता है। और कश्मीर से मेरा बहुत अच्छा सम्बन्ध है। बहुत अच्छा लगा आपका विचार पढ़कर।

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  6. इसे कहते हैं हैं एक मुकम्मल ब्लॉग पोस्ट | पढ़ के मुंह से बेसाख्ता निकला वाह न सिर्फ जरूरी जानकारी बल्कि। हर छोटी बड़ी काम की बात का उल्लेख कर दिया आपने | आपको पढ़ने की आदत होती जा रही है

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  7. इसे कहते हैं हैं एक मुकम्मल ब्लॉग पोस्ट | पढ़ के मुंह से बेसाख्ता निकला वाह न सिर्फ जरूरी जानकारी बल्कि। हर छोटी बड़ी काम की बात का उल्लेख कर दिया आपने | आपको पढ़ने की आदत होती जा रही है

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  8. […] अमरनाथ यात्रा में इस शेषनाग झील का खासा महत्व है। यह झील चंदनवाडी से लगभग 16 किलोमीटर दूर है। अंकित मैं और प्रमोद पिछले 16 किलोमीटर से लगातार पैदल चल रहे हैं। और एक कपिल है जो अभी युवावस्था में ही है, और वह घबराकर खच्चर पर बैठ कर आगे बढ़ जाता है। खैर.!! यह झील सर्दियों में जम जाती है और कभी-कभी तो  ज्यादा ठंड होने के कारण  यह यात्रा के दौरान भी जमी रहती है। तथा यहां से लिद्दर नदी का उद्गम होता है। इस झील पर एक पौराणिक कथा भी है कहते हैं भगवान भोलेनाथ जब मां पार्वती को अमर कथा सुनाने अमरनाथ की गुफा में ले जा रहे थे तो वह चाहते थे कि इस कथा को मां पार्वती के सिवा ओर कोई न सुने। तो इसलिए वह अपने सभी सांपो नागों को अनंतनाग में, नंदी को पहलगाम में, चंद्रमा को चंदनवाड़ी में छोड़ देते हैं। लेकिन उनके साथ अभी शेषनाग है और भगवान भोले शंकर शेषनाग को शेषनाग झील में छोड़ते हैं तथा यह जिम्मेदारी लगाते हैं कि जब तक भगवान भोले शंकर मां पार्वती को अमर कथा सुनाकर वापिस ना आए तो वह तब तक किसी को भी शेषनाग झील से आगे ना जाने दें। कुछ लोगों का कहना है कि इस झील में कभी-कभी शेषनाग को देखा गया है और मुझे लगता है शायद ऐसा हुआ भी हो क्योंकि एक तो इस झील का पानी बिल्कुल नीला है दूसरा जब यह झील सर्दियों में जम जाती है तो इसका आकार बीच में शेषनाग की तरह हो जाता है तो इस आधार पर कहा जा सकता है कि वास्तव में इस झील में आज भी शेषनाग निवास करता है। यहां से अभी बेस कैंप लगभग 3 किलोमीटर दूर है कुछ ही देर में हम शेषनाग पहुंचते हैं और वहां पर कपिल का इंतजार करते हो तथा उसको इधर-उधर ढूंढते हैं लेकिन वह नहीं मिला हमने उसका कई बार भंडारों से नाम भी बुलवाया लेकिन वह नहीं मिला और अब इस सब काम में हमें शाम के 4:00 बज गए आखिर क्या करते अब आगे नहीं जा सकते। दिल टूट सा गया क्योंकि हमने तय किया था की आज शेषनाग पार तो कर ही रहेंगे और रात पंचतरणी में ही बिताएंगे लेकिन ऐसा हो न सका। खैर हमने तंबू लिया सामान रखा पर चले गए भंडारों में खाना खाने। जब हम भंडारे से खाना खाकर वापस तंबू में आ रहे थे तो हमें एक std दिखी यहां से मैंने अपने घर फोन किया तो पता चला कपिल तो पंचतरणी पहुंच गया और कल बाबा के दर्शन करके सीधा अंकल के घर ही मिलेगा। तो ज्यादा बात ना करते हुए मैंने फोन रख दिया। लेकिन बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि उसने बोला था कि हम पिस्सू टॉप मिलेंगे। तो उसने वादा खिलाफी की। खैर कोई बात नहीं अब हम निश्चिन्त हो गए चिंता जो चिता के सामान होतो है वह हमसे दूर हो गई। बस फिर क्या था हम तंबू में आकर सो गए। […]

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  9. धन्यवाद सचिन जी

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  10. हितेश जी बहुत उपयोगी पोस्ट लिखी है आपने।

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