स्वर्ग सरीखा श्रीनगर शहर

इस यात्रा-वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें।

1 जुलाई 2015 सुबह 6 बज रहे है। ठण्ड बहुत हो रही है, रात में नींद काफी अच्छी आई सोते समय रिज़ाई की जरुरत पड़ी लेकिन हमारी सारी थकान दूर हो चुकी है। अभी सो कर उठे ही थे के आंटी चाय लेकर आयी, चाय टेबल पर रखते हुई बोली यहाँ 5 किलोमीटर की दुरी में ही आसपास कई सारी जगह है घूमने की, मैंने अपने भाई को बोल दिया है वह आपको 9 बजे यह सब जगह घुमाने लेकर चला जायेगा मैंने उत्सुकता से पूछा आंटी कहाँ-कहाँ लेकर जायेंगे..?? वह बोली यहाँ पास में ही डल गेट, लाल चौक, लाल चौक पर हनुमान मंदिर, कश्मीर विश्वविद्यालय, मुग़ल गार्डन, जम्मू-कश्मीर विधानसभा आदि कई जगह है, वह लेकर चला जायेगा

अगर अंकल नहीं होते तो हमे यह सब घूमने में कितनी समस्या होती न जाने कितने पैसे खर्च हो जाते पर पैसे खर्च करने के बाद भी उतना अच्छे से यह सब घूम नहीं पाते कश्मीर घूमने का आंनद कई ज्यादा गुना बढ़ जाता है अगर रुकने खाने की व्यवस्था हो जाये तो पर यहाँ तो रुकने, खाने के साथ कश्मीर घूमाने की व्यवस्था  हो गई। बातों बातों में पता ही नहीं चला कब 8 बज गये, हम जल्दी से 1 घण्टे तैयार हुए और 9 बजे आंटी के भाई गाडी के साथ बिलकुल तैयार खड़े है। हम उनके साथ बैठे और चल पड़े, देखते है अब यह हमे कहाँ कहाँ लेकर जाते है..!!!
अंकल के घर में मैं

अरे यार अंकित यह क्या..!! यहाँ सड़क कितनी साफ़ है। मैंने अंकित से कहा। तभी अंकल के साले साहब बोल पड़े यहाँ कोई सड़क पर गंदगी नहीं करता कूड़ा कूड़ेदान में ही डालते है, और यहाँ प्रदुषण भी नहीं है। ऐसी सामान्य बातें करते करते हम सबसे पहले कश्मीर विश्वविद्यालय पहुंचे। जहाँ बड़े बड़े अक्षरों में ध्येय वाक्य लिखा है, तमसो मा ज्योर्तिगमय यह देखकर हम अचंभित हो गये यह देखकर। यह वाक्य तो हमारे वेदों में लिखा है..!! पर यह हमारे देश की संस्कृति है, हमारे देश की विरासत है, अच्छी बात अपनाने का हर किसी को बराबर हक़ है। फिर चाहे वह किसी भी जाती, मत, पंथ, सम्प्रदाय से हो। थोड़ी देर रुकने के बाद हम चल पड़े आगे की ओर। मुसाफिर तो आगे बढ़ता रहता है, चलता रहता है।
कश्मीर विश्वविद्यालय के बाहर मैं

अंकल की कार में हम

कुछ देर बाद हम पहुंचे निशात बाग़। यह बाग, डल झील के पूर्वी तरफ स्थित है, जिसे 1633 में हसन आसफ खान, मुमताज महल के पिता और नूर जहान के भाई द्वारा बनाया गया था। निशात बाग का अर्थ होता है खुशियों का बगीचा। इस गार्डन में फूलों की दुर्लभ प्रजातियां, चिनार वृक्ष और सरू के पेड़ भी पाएं जाते हैं।यह मुगल गार्डन, क्षेत्र का सबसे बड़ा सीढ़ीदार उद्यान है। यहां स्थित सुंदर फव्‍वारों, बड़े से लॉन और खूबसूरत फूलों के कारण यह बगीचा काफी विख्‍यात है। कहा जाता है कि शाहजंहा प्रसिद्ध मुगल सम्राट और अब्दुल हसन आसफ खान का दामाद था और इस बाग को देखकर वह बहुत प्रभावित हुआ था। इसको देखने के बाद उसने चुपके से यह आशा व्‍यक्‍त की थी कि उसके ससुर उसे यह बाग उपहार में दे दें। बाद में ससुर द्वारा बगीचे को गिफ्ट न करने पर उसने बगीचे में पानी की सप्‍लाई को रूकवा दिया था।
यहाँ आकर ऐसा लगा जैसे कही स्वर्ग में आ गये हो इतनी हरियाली पेड़ और रंग बिरेंगे फूल इस तरह मन मोह रहे थे जैसे इंसान अपनी ज़िन्दगी में किसी के लिए कुछ नहीं बस प्रकृति के लिए उर प्रकृति उसके लिये।

निशात बाग़ का मनमोहक दृश्य और मैं

निशात बाग के बाहर मैं अंकल का बेटा आसिफ और बेटी मदिया

निशात बाग़ में पहाड़ों की गोद में मैं प्रमोद और अंकल के बेटा- बेटी

निशात बाग़ के फुआरे के बीच में मैं


अब हम पहुंचे चश्‍म - ए - शाही यह गार्डन, एक प्राचीन उद्यान है जिसे 1632 में स्‍थापित किया गया था। यह श्रीनगर का सबसे छोटा मुगल गार्डन है जिसकी लम्‍बाई 108 मीटर और चौड़ाई 38 मीटर की है। इसके अलावा, इस गार्डन को रॉयल स्प्रिंग के नाम से भी जाना जाता है।  यह गार्डन, जलसेतु, झरने और फव्‍वारे के साथ तीन भागों में बंटा हुआ है। यह गार्डन, नेहरू मेमोरियल पार्क के आसपास के क्षेत्र में स्थित है जहां से हिमालय और डल झील का शानदार दृश्‍य दिखता है। यहां फलों और फूलों की कई दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलती हैं। गार्डन में स्‍वच्‍छ पानी का झरना बहता है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसके पानी में काफी मात्रा में औषधिय गुण हैं जो स्‍थानीय लोगों को काफी आकर्षित करता है। और यह भी कहा जाता है जब जवाहरलाल नेहरू यहाँ रहते थे तो इस गार्डन से नित्यप्रति पानी पीने के लिये मंगाते थे।

उसके बाद हम डल झील गए यह झील श्रीनगर, कश्मीर में एक प्रसिद्ध झील है। 18 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई यह झील तीन दिशाओं से पहाड़ियों से घिरी हुई है। यह जम्मू-कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी झील है। इसमें सोतों से तो जल आता है साथ ही कश्मीर घाटी की अनेक झीलें आकर इसमें जुड़ती हैं। इसके चार प्रमुख जलाशय हैं गगरीबल, लोकुट डल, बोड डल तथा नागिन। लोकुट डल के मध्य में रूपलंक द्वीप स्थित है तथा बोड डल जलधारा के मध्य में सोनालंक द्वीप स्थित है। भारत की सबसे सुंदर झीलों में इसका नाम लिया जाता है। पास ही स्थित मुगल वाटिका से डल झील का सौंदर्य अप्रतिम नज़र आता है। पर्यटक जम्मू-कश्मीर आएँ और डल झील देखने न जाएँ ऐसा हो ही नहीं सकता।

डल झील के मुख्य आकर्षण का केन्द्र है यहाँ के शिकारे या हाउसबोट। अब इन शिकारों से हम कैसे अछूते रह सकते थे..? हमने भी शिकारों का खूब आनंद लिया, घंटों तक शिकारे में ही रहे, जिसमे हमारे शिकारे पास चलती फिरती आइसक्रीम की दुकान आई आईसक्रीम का नाम है गुलबदन जितना अच्छा नाम उतनी स्वादिस्ट आईसक्रीम। अब बहुत देर हो चुकी थी समय काफी हो गया है अभी और जगह भी जाना है। मन नहीं कर रहा था जाने का पर हम चल पड़े क्योंकि जन्नत अभी और भी है।
डल झील शिकारे में मैं

चलती फिरती तैरती गुलबदन आईसक्रीम की दुकान

गुलबदन आईसक्रीम का मज़ा लेते हुए मैं प्रमोद और अंकित

काफी देर हो गई थी थोड़ी देर में रोज़ा खोलने का समय भी हो रहा था आज अंकल के साले साहब का रोज़ा था तो उसको भी थोड़ी जल्दी थी। अब हम वापिस चल पड़े रास्ते में जम्मू कश्मीर विधानसभा होते हुए सीधे पहुंचे लाल चौक। जी हाँ वही लाल चौक जिसके बारे में काफी कुछ सुनने को मिलता है मीडिया आदि में पर अभी ऐसा कुछ नहीं है बाजार लगा हुआ है बाजार में काफी अच्छी खासी भीड़ है बिलकुल ऐसी ही भीड़ जैसी चांदनी चौक के बाज़ारों में होती है। बाजार से होते हुए हम पंचमुखी हनुमान मंदिर पहुंचे। मंदिर के अंदर जाने के लिए सेना के सुरक्षा घेरे को पार करके जाना पडता है। मंदिर में दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया। शाम हो चुकी है, हम काफी थक भी गये है अब सीधे चल पड़े घर की ओर।
पंचमुखी हनुमान मंदिर के बाहर हम चारों

लाल चौक श्रीनगर


अंकल के साले साहब हमे अंकल के घर छोड़ कर अपने घर चले गए। पहुँचते ही पता चला अंकल आंटी ने आज रोज़ा नहीं रखा क्योंकि रोज़े में जिसका रोजा होता है उनके आगे कुछ खाते पीते नहीं है। उनका इतना अपनत्व देखकर बहुत अच्छा लगा पर दुःख इस बात का हुआ हमारी वजह से वह रोज़ा नहीं रख पाये। खैर आंटी ने कश्मीर की मशहूर राज़मा चावल और रोटी बना रखी है। मज़ा आ गया खाकर एकदम लाजवाब। भोजन करने के बाद अंकल के गार्डन में टहले और टहलते टहलते ही विचार बना अमरनाथ जी भी जायेंगे आज का तो सारा दिन निकल गया वहां जाने के लिये रेजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। यह काम कल करवायेंगे अभी बहुत नींद आ रही है तो हम सो गये।

अगले भाग में जारी...







Comments

  1. boht ache, aagey ki yatra ka intazaar rahega

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद जी जल्द ही मिलेगी आगे की यात्रायें

      Delete
  2. रोचक वर्णन ... आपके आंटी अंकल वास्तव में महान हैं .

    ReplyDelete
  3. रोचक वर्णन ... आपके आंटी अंकल वास्तव में महान हैं .

    ReplyDelete
    Replies
    1. बिलकुल धन्यवाद जी।

      Delete
  4. इसे पढ़कर एक सवाल कौंध रहा है की 6 महिने में पाकिस्तान परस्त लोगो ने माहौल बर्बाद कर दिया? स्वर्ग को नर्क में तब्दील कर दिया? आखिर कैसे?

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

चोपता, तुंगनाथ, चन्द्रशिला ट्रैक (भाग-1)

Centre of meditation and spirituality – Almora

चटोरों का चांदनी चौक