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लद्दाख बाइक यात्रा भाग 2 (शिमला से कुल्लू)

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अगले दिन 17 जून को घड़ी में सुबह के 5 बज रहे थे आंख खुली तो बाहर जाकर देखा सूर्य देव की लालिमा धीरे धीरे इस जग को जगमगा रही है। रात बहुत मस्ती की थी इस कारण से सब अभी तक सो ही रहे थे। मुझे जल्दी उठने की हमेशा से आदत रही है। तो रात चाहे कितने भी बजे सोयूं सुबह समय से ही उठ जाता हूँ। और पहाड़ों पर तो सन राइज देखने का अलग ही आनंद है। कुछ देर बाद मैंने फेसबुक पर स्टेटस अपडेट करते हुए डाल दिया ट्रैवलिंग शिमला टू लेह। अब कई सारे दोस्त कहने लगे की स्पिति वैली होते हुए जाओ। एक तो अपने पास वैसे ही दिन बहुत कम और ऊपर से प्रवीण को सारी व्यवस्था कुल्लू में ही करनी है। तो हम लद्दाख वाया कुल्लू मनाली ही जायेंगे। ऐसा पहले से ही तय कर लिया था। अब हमे समय पर कुल्लू पहुंचना है तो नित्यकर्म से निर्वित होकर नाश्ता करके कुल्लू के लिए निकलना ही ठीक था। लेकिन इतने में ही सुबह के 11 बज गए थे। आखिर हरि अनंत हरि की कथा अनंत खत्म ही नहीं होती ये बातें, चलती ही रहती है। अरे कमल भाई अब हम निकलते है... ठीक है ठीक है भाई साहब वो मेरे पास कुछ पॉलीथिन रखी है र…

लद्दाख बाइक यात्रा भाग 1 (दिल्ली से शिमला)

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एक यायावर के जीवन में यात्राओं का विशेष महत्व रहता है। और इसकी शुरुआत इतनी रोचक होती है कि इसकी मात्र कल्पना ही की जा सकती है। ऐसी ही मेरी इस यात्रा की शुरुआत हुई। बहुत दिन से शिमला में रहने वाला एक दोस्त बुला रहा था। अभी नेपाल यात्रा करके 14 जून 2018 को लौटा ही था कि सोचा शिमला भी हो आता हूँ। यूं तो शिमला कई बार जाना हुआ है। वहां कई महीनों तक रहा भी हूँ। लेकिन दोस्तों से मिलने का एहसास अलग ही होता है।
और सफर में कोई दोस्त हमसफर बन जाये तो और भी बढ़िया है। यात्रा बिल्कुल मज़ेदार हो जाती है। इसलिए हांसी निवासी प्रवीण को फोन किया। वह अभी भिवानी के पास है रात तक अम्बाला पहुंच जाएगा। मुझे उसको अम्बाला से लेना है। मैंने उसे सुबह 6 बजे का समय दे दिया।
शिमला वाले दोस्त से 11 बजे मिलना है उसके लिए दिल्ली से सुबह 3 बजे चलना पड़ेगा तो 2 बजे का अलार्म लगा लिया और जल्दी ही सो गया। 2 बजे उठा पानी पिया और नहा धोकर फ्रेश हुआ तो 3 बज चुके थे। बस फिर क्या था निकल पड़ा धूल उड़ाते हुए। सड़के बिल्कुल खाली थी कब सोनीपत आया पता ही नहीं चला। बाइक 100-110 की स्पीड पर चल रही थी। कुछ दूर घरौंदा पहुंचा इंद्र देव कुछ…

पटना वाटरफॉल ऋषिकेश

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45℃ तापमान में क्या हाल होता है ये हर कोई जानता है। इंसान तो इंसान बेचारा बेज़ुबान जानवर भी परेशान रहता है। तो ऐसी भीषण गर्मी से बचने के लिए मन रास्ते ढूढ़ने लगा। आखिर कहाँ जाया जाए.?
यदि दिल्ली के सबसे नजदीक कुछ है तो वह हरिद्वार है। मन में भी सबसे पहले हरिद्वार का नाम आया। वैसे तो वहां भी गर्मी ही है लेकिन पहाड़ की तलाई में बसा हरिद्वार दिल्ली से तो कई गुणा ठीक है।
10 मई 2017 को दोपहर निकल गया जन शताब्दी एक्सप्रेस से हरिद्वार के लिए। इस ट्रेन में मुझे यात्रा करना बहुत अच्छा लगता है। रात 8 बजे मैं हरिद्वार पहुंचा और वहां नानी के घर ही दोस्त को बुलवा लिया उसके साथ खाना खाया और सुबह ऋषिकेश पटना वाटरफॉल जाने का कार्यक्रम बनाया।
वैसे तो हरिद्वार ऋषिकेश में सब जगह घूमा ही हूँ इस बार लेकिन दोस्तों के साथ मज़ा कुछ और ही है।
सुबह करीब 10:30 बजे हम 1 बाइक से 3 जने हरिद्वार से निकले। मौसम बिलकुल सुहावना बना हुआ है। मन कहता है बस हम यूं ही चलते जायें। चंडी घाट पहुंचे थे कि मैंने बाइक हाइवे से न लेकर चिल्ला के रास्ते को मोड़ दी। माँ गंगा के साथ साथ बाइक चलाना बेहद शानदार लग रहा था। और उस दूर क्षितिज की च…

चोपता, तुंगनाथ, चन्द्रशिला ट्रैक (भाग-1)

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आइये आज आपको लेकर चलते है भगवान शिव के पावन धाम, पंचकेदारों में से एक केदार धाम बाबा तुंगनाथ जी की यात्रा पर। तुंगनाथ मंदिर बाबा भोले शंकर के पंच केदार में से तृतीय केदारधाम है। पंच केदार का क्रम इस प्रकार है।

1. केदारनाथ

2. मद्महेश्वर
3. तुंगनाथ
4. रुद्रनाथ
5. कल्पेश्वर


अपनी कंपनी घुमक्कड़ी एडवेंचर जिसकी शुरुआत मैंने और सुनीता शानू जी ने की तो इसके माध्यम से तुंगनाथ चंद्रशिला यात्रा का आयोजन 29 सितंबर2017को किया गया। अब प्रोफेशनल कंपनी है तो इसका पूरा टूर पैकेज बनाया गया और समय से इसको सोशल साइट पर प्रमोट किया जिससे कई यात्री घुमक्कड़ी एडवेंचर के साथ जुड़े। जिनमे नीति टंडन, सौनाक्षी, मानू, अंजली, पूनम माटोलिया, अचला शर्मा, मनोज शर्मा, मनोज कुमार, ऋषिता, दिव्या, युधिष्ठिर, गरिमा, उर्वशी, दीपिका, मंजू शर्मा, पवन चोटिया, दीपक, शिवा और विक्रम रहे । यह सब लोग अलग अलग जगह से हमारे साथ जुड़े और तुंगनाथ चंद्रशिला ट्रैक पर जाने के लिए तैयार हुए। और खास बात यह रही कि हमारे साथ दिल्ली से ही खाने बनाने का सामान और हलवाई साथ गए।




दिल्ली से वापिस दिल्ली लौटने तक सभी व्यवस्था हमारी थी। जिसका शुल्क5999/- प्रति …

मलेशियाई दोस्त ऐश और सुनीता जी के साथ दिल्ली दर्शन

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दिल्ली में रहने वाले लोग आखिर कहां दिल्ली घूमते है। वह तो इतने प्रदूषण से कहीं दूर किसी पहाड़ी पर जाना पसंद करते है। अपना भी यही हाल है मुझे पहाड़ बहुत पसंद है। लेकिन ऐसे में यदि मेरा कोई मित्र विदेश से आ रहा हो तो उसको दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर से परिचय कराना मेरा दायित्त्व बनता है।


जी हां मेरी दोस्त ऐश जो मलेशिया की नागिरक है वह काउच सर्फिंग के माध्यम से मुझसे जुड़ी थी। 19 जुलाई 2017 को उसका दिल्ली आने का कार्यक्रम बना। देर रात उसकी फ्लाइट दिल्ली। अब उससे बात पहले ही हो गई थी  यदि दिल्ली पूरी घूमना है तो सुबह 8 बजे मिल जाना शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर, अगर देर हुई तो कई जगह रह जाएगी। अरे भाई दिल्ली कोई छोटी सी थोड़ी है जो एक दिन में पूरी घूमी जा सके।
लेकिन 20 जुलाई 2017 की सुबह हुई तो 4 बजे से ही इंद्र देवता दिल्ली पर अपनी कृपा बरसा रहे थे। जिसका सिलसिला लगभग 10 बजे के आसपास रुक गया। अब उन्होंने अपनी कृपा बरसानी रोकी तो हम घर से निकल पाये। और ठीक 11 बजे ऐश मिल गई मुझे शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर।

वहां से हम सीधा दिल्ली गेट मेरे घर आ गए और ऐश को अपने यहां के मशहूर ब्रेड पकोड़े और बढ़िया मसाला चा…