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चटोरों का चांदनी चौक

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जब आप चटोरों के चांदनी चौक में आओगे, तो आप यहां के खानों को नहीं भूल पाओगे। यहां चहल-पहल भरी गलियां मिलेंगी, जो विभिन्न व्यंजनों की महक से सरोबर होती हैं। व्यंजनों के कद्रदानों के लिए करीम जैसे रेस्तरां हैं, साथ ही मांसाहारी खानों के पुराने शौकीन हैं, वे मोती महल में बटर-चिकन का लुत्फ उठा सकते हैं।
स्ट्रीट फूड
चांदनी चौक को प्रायः भारत की फूड-कैपिटल भी कहा जाता है, जो अपने स्ट्रीट फूड के लिए प्रसिद्ध है। यहां अनेक प्रकार के स्नैक्स, विशेषकर चाट, मिलते हैं।  टदि आप इनका आनंद लेना चाहते हैं तो सब-कुछ भूलकर इनके स्वाद और खुश्बुओं में खो जाएं। आप सभी यहां आएं...और मिल-जुलकर इनका आनंद उठाएं। चांदनी चौक में प्रतिदिन मेले जैसा माहौल रहता है। गलियों में हलवाई, नमकीन बेचने वालों तथा परांठे-वालों की कतार में दुकाने हैं।
बेहतर होगा कि आप परांठे वाली गली से शुरुआत करें, 1870 के दशक से,  जब यहां परांठों की दुकान खुली थी, तभी से यह स्थान चटोरों के स्थान के नाम से लोकप्रिय हो गया था। इस गली में भारत की कई नामी हस्तियां आ चुकी हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पं.जवाहरलाल नेहरु और उनके परिवारजन - इंदिर…

चाँदनी चौक की गलियां

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वैसे तो मेरा जन्म भी पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक क्षेत्र दरियागंज में हुआ। इस कारण से कई मित्रों का कहना था कि हितेश भाई आप हमें पुरानी दिल्ली के बारे में कुछ बताओ। बड़े चर्चे सुने है पुरानी दिल्ली की गलियों के, चांदनी चौक की गलियों में बड़ा इतिहास छुपा है। सुना है चटोरों की जान बस्ती है चांदनी चौक में। तो मैंने कहा यार जानकारी तो आजकल इंटरनेट पर ही मिल जाती है। फिर वह कहने लगे आप वहां के रहने वाले हैं आपसे जानकारी कुछ अलग ही मिलेगी तो उनके आग्रह पर पुरानी दिल्ली की गलियों की छोटी सी जानकारी आपके सामने है।
कहते हैं पहले दिल्ली केवल 6 गेटों में थी। दिल्ली गेट, तुर्कमान गेट, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, मोरी गेट, और कश्मीरी गेट। इन 6 गेटों में बसी दिल्ली को ही दिल्ली कहा जाता था बाकी सब आसपास जंगल हुआ करता था। लेकिन आज तो हम जानते हैं दिल्ली कितनी बड़ी हो गई है लेकिन इन 6 गेटों वाली दिल्ली को अब पुरानी दिल्ली कहा जाने लगा इसकी शुरुआत दिल्ली गेट से होती है। कहते हैं दिल्ली गेट दिल्ली में प्रवेश करने का मुख्य द्वार हुआ करता था।

बाद में मुगलों द्वारा फिरोज शाह कोटला व खूनी दरवाजे का निर्माण करवाया…

सपनो का शहर शिमला: भाग 2

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आपने अब तक पढ़ा कि कल हम कालीबाड़ी मंदिर, मॉल, और रिज गए और लौटते वक्त हमे शाम के 8 बज गए फिर हम खाना खा के सो गए। इस यात्रा-वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहाँ क्लिक करें।
लगभग सुबह 5 बजे उठा तो रजाई से बाहर निकलते ही काफी ठण्ड लगने लगी। लेकिन जल्दी से मुह हाथ धोया और सुबह लगभग 6 बजे ही निकल दिए फिर वही रेलवे स्टेशन तो हमारे रस्ते का मिडवे बन गया था रिज़ पर होते हुए हम पहुच गए जाखू मंदिर के रस्ते पर। मनमोहक द्रश्य से गुजरते हुए हम पहुंचे जाखू मंदिर। इतनी ऊँची मूर्ति मैंने अपने जीवन में पहली बार देखी आनंद आ गया।
कहते है कि जब हनुमन जी संजीवनी बूटी लेने के लिए जा रहे थे, तब उन्होंने ऋषि राक्ष को तपस्या करते देखा। तो वह संजीवनी का पता जानने के लिए इस पर्वत पर उतरे और उन्हें (राक्ष+याक+याकू=जाखू) नाम पड़ा। आप कभी शिमला आयें तो यहाँ जरुर आयें।











जाखू के बाद मैं पैदल ही चल पड़ा और पहुँच गयेया इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज यह पहले राष्ट्र्पति निवास हुआ करता था मैं आपको इतिहास के बारे में तो नहीं बताऊंगा लेकिन है इतनी मस्त जगह जिसका कोई जवाब नहीं। इसमें सुन्दर गार्डन है और मियुजियम में क…