अमरनाथ यात्रा: पहलगाम से पिस्सू टॉप

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4 जुलाई 2015 की दोपहर में हम पहलगाम पहुँच गए। अमरनाथ यात्रा का आधार स्थल पहलगाम है तो यहाँ केंद्रीय रिज़र्व पुलिस के तंबू लगे है तो यात्रियों को एक रात के लिए तो यहाँ रुकना ही होता है। हम भी रुके रात को बाजार में से कुछ जरुरी सामान जैसे दस्ताने खरीदे। भंडारे में भोजन किया और हम सो गए। सुबह उठे लगभग 4 बजे फ्रेश हुए कुल्ला किया मुह धोया इसमें लगभग आधा घंटा चला गया। फिर हमने अपना सामान उठाया और निकल पड़े सुबह सुबह का नज़ारा देखने लायक था। एकदम मस्त लग रहा था। थोड़ी देर बाद ही 5 बज गए और ठीक 5 बजे पहलगाम से चंदनवाड़ी का रास्ता खुल गया हमने वहां से गाडी पकड़ी जो अपने अलग अलग हिसाब से पैसे मांग रहे थे कोई 150 कोई 100 लेकिन हमने सिर्फ 70 रु की गाडी की और चल दी चंदनवाड़ी की ओर जैसे आगे बढेगें तो रास्ते में एक जगह पड़ती है बेताब घाटी.!! बेताब घाटी में फिल्म बेताब की शूटिंग हुई थी वैसे यहाँ और भी कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है जैसे हैदर के भी कुछ सीन यहाँ के है। गाडी चल रही थी ये क्या देखते ही देखते गाडी रुक गयी बाहर जाम लगा था ड्राइवर को पूछा ये जाम कैसे है तो वो बोला लगभग 1 किलोमीटर आगे ही चंदनबाड़ी है काफी संख्या में लोगो का जाना होता है तो जाम लगना स्वभाविक ही है लेकिन बाबा बर्फानी के भक्तों को अपने जीवन चक्र चलाने वाले देवाधी महादेव बाबा अमरनाथ के दर्शन की इतनी जल्दी है के सब गाड़ियों से निकल कर चंदनवाड़ी की तरफ पैदल ही चल पड़े फिर हम कैसे पीछे रह जाते हमे भी ललख थी बाबा के दर्शन जल्द से जल्द करने की हम भी चल दिए पैदल। यहाँ सबके सामन की जाँच होती है सेना की बहुत चाक चौबंद व्यवस्था होती है वहां चेकिंग के तीन तीन राउंड पुरे करने होते है। हम तो अपना लगभग सारा सामान अंकल के घर ही छोड़कर आये थे



चंदनवाड़ी पर सुरक्षा घेरा

मैं,अंकित, प्रमोद और कपिल

अभी हमें भी सुरक्षा घेरा पार करना है


इसलिए कोई समस्या नहीं हुई। वैसे भी ट्रैकिंग करते हुए सामान काम से कम ही रखना चाहिए साथ। यहाँ पर अनेकों भंडारे थे जिसमें चारों तरफ नज़र घुमाने पर एक ही चीज दिख रही थी वह बाबा के भक्त है। चंदनवाड़ी से पैदल यात्रा शुरू होती है। चंदनवाड़ी पहलगाम से सोलह किलोमीटर दूर है। पैदल यात्रा मार्ग व पड़ाव ऐसे है - पिस्सू टॉप 3 किलोमीटर, फिर जोजपाल, शेषनाग, महागुनस, पौष पत्री, पंचतरणी, संगम और गुफा। पैदल यात्रा का पहला पड़ाव पिस्सू टॉप है। यह मार्ग तीन किलोमीटर का है लेकिन सबसे मुश्किल भी। ऊपर देखने पर जब सिर गर्दन को छूने लगे तो एक चोटी दिखती है, उसे पिस्सू टॉप कहते हैं। ध्यान से देखने पर वहां भी रंग-बिरंगी चींटियां सी चलती दिखती हैं। कई यात्री जो घर से सोचकर आते हैं कि हम पूरी यात्रा पैदल ही करेंगे, इस चोटी को देखते ही ढेर हो जाते हैं। जरा सा चढते ही खच्चर वालों से मोलभाव करते दिखते हैं।

कहते हैं कि कभी इस स्थान पर देवताओं का और राक्षसों का युद्ध हुआ था। देवता जीत गये। उन्होंने राक्षसों को पीस-पीसकर उनका ढेर लगा दिया। उस ढेर को ही पिस्सू टॉप कहते हैं। पिस-पिसकर लगे ढेर को पिस्सू नाम दे दिया।

यह रास्ता बेहद चढाई भरा है। ऊपर से पानी भी आता रहता है। खच्चर वाले भी सबसे ज्यादा इसी पर मिलते हैं, क्योंकि आगे का रास्ता अपेक्षाकृत आसान है।
हम अभी थोड़ी ही आगे बढे थे के कपिल थक गया बोला मैं खच्चर कर लेता हूँ पिस्सू टॉप मिलूंगा। हट्टा कट्टा कपिल पिस्सू टॉप तक पैदल नहीं चल पाया इससे आप अंदाजा लगा सकते है कैसी चढाई होगी। हम उसको छोड़कर आगे बढ़ निकलें थोड़ी देर बाद बहुत कठिन चढ़ाई चढ़ कर हम पिस्सू टॉप पहुंचे तो यहाँ कपिल नहीं मिला। हमने करीब 30 मिनट इन्तजार किया लेकिन कपिल नहीं आया।


पिस्सू टॉप पर मैं और अंकित प्रमोद कपिल का नाम बुलवाने भंडारे में गया

पिस्सू टॉप पर मैं

पिस्सू टॉप पर अंकित


फिर हमने उसका नाम एक भंडारे से बुलवाया लेकिन पता नहीं लगा। यह सोच कर हम आगे बढ़ चले के शेषनाग मिल जायेगा और मन में ठान लिया था के आज शेषनाग पार करके पंचतरणी पहुंचना है। नहीं पहुंचे तो आज रात शेषनाग ही रुकना पडेगा।
आगे देखते है हमे कपिल मिला या नहीं.?? क्या हम 1 बजे तक शेषनाग पर कर पाये या नहीं.???

Comments

  1. आगे का किधर है?

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    1. आगे का भी मिलेगा जी उसके लिए थोड़ा सब्र रखना पड़ेगा जी

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