सम (सैंड ड्यून्स) रेगिस्तान जैसलमेर

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सुबह से हम बेफ़िक्रों की तरह घूम रहे हैं, बहुत ज्यादा थकावट भी होने लगी है आराम करने का मन करने लगा है लेकिन हमारे पास समय भी बहुत कम है। तो इसलिए आराम करना वाजिफ नही। हम कुलधरा से सम (सैंड ड्यून्स) के लिये निकल पड़े।


थोड़ी देर बाद हम सैंड ड्यून्स पहुंचे। वहां पहुंचते ही मेरी तो सारी थकावट दूर हो गई। वहां हर शाम रिसॉर्ट्स में राजस्थानी लोक नृत्य का दिल को छू लेने वाला आयोजन होता है। लेकिन मैंने राजेश को आराम करने नहीं दिया।


अभी तेज धूप हो रही है गर्मी भी काफी लग रही है, ऊंट की सफारी करते है। वो बोला अभी धूप तेज है थोड़ी देर बाद करेंगे। लेकिन मैं नहीं माना और ले गया उसको धूप में ही ऊंट की सफारी करने।


ऊंट वाले ने हम दोनों से 100 रू लिए और काफी दूर तक ऊंट की सफारी कराई। हमने धूप में ही ऊपर कुछ फोटो खींची। और थोड़ी देर बाद आराम करने लगे। अब शाम हो गई है। और यहाँ से सूर्य अस्त होता हुआ बहुत ही आकर्षक लगता है। हज़ारों सैलानी यह सूर्यास्त देखे बिना नहीं जाते। 

दूर दूर तक फैला रेगिस्तान

ऊंट पर मैं

मैं और राजेश धूप में भी मस्ती करते हुए

वाह मज़ा आ गया

रेत पर अपने नाम का पहला अक्षर लिखा मैंने



तो इस सबमे हम कैसे पीछे रह जाते हम भी दुबारा बैठ गए ऊंट पर उसकी सफारी से सूर्यास्त देखने के लिए चलो अब बहुत हो गया अब सवारी कह देते है। दूर दूर तक रेगिस्तान है। ऊंट वाला हमे Sun Set point पर ले गया। वास्तव में नज़ारा देखने लायक है मज़ा आ गया। उसके बाद फिर कुछ फोटो खींचे।

राजेश और मैं ऊंट की सफारी करते हुए

सूर्यास्त का मस्त नजारा



और जब ऊंट की सफारी ओह सवारी करके वापिस आये तो रिसोर्ट में कलाकारों द्वारा आरती उतार कर टीका लगा कर हमारा स्वागत किया गया। जैसे अपने घर में शादी वाले दिन आते है तो माँ आरती उतार कर स्वागत करती है। इस सब के बाद हम अंदर गये। देखा तो राजस्थानी लोक नृत्य का मंच सज चूका था। थोड़ी देर में कार्यक्रम शुरू होने वाला है। जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ राजस्थानी गीतों पे पायल छमछमाने लगी। अलग अलग कलाकारी हो रही है। अरे यह क्या हाथ में आग उठा ली और हाथ जला भी नहीं। यह देखकर तो मैं कायल हो गया। लगभग डेढ़ घंटे बहुत ही रोमांचकारी कार्यकम चला। उसके बाद राजस्थानी खाना वही हुआ मज़ा आ गया।

बढ़िया व्यवस्था

इतना आकर्षित किया कि पर्यटक खुद भी कलाकारों के साथ झूम उठे



हमे थोड़ी जल्दी भी थी लगभग 9 बज गए थे। हम वहां से जल्दी से निकले और पहुँच गए जैसलमेर संघ कार्यालय। वहां थोड़ी देर आराम किया और वहाँ के कार्यकर्ता नरेश जी दिनेश जी आदि हम छोड़ने स्टेशन तक पैदल शॉर्टकट रस्ते से लेकर गए हम लगभग 15 मिनट में स्टेशन पहुंचे। ट्रैन प्लेटफॉम पर लगी हुई थी। उसमे बैठे और पता ही नहीं लगा कब ट्रैन चल दी और हम रात भर सोये और अगले दिन शाम तक दिल्ली आ गए। 

यह यात्रा हमारी बहुत ही मज़ेदार रोचकता से भरपूर नए अनुभवों के साथ पूरी हुई।

Comments

  1. Wow nice to know about sand dunes and sunrise .really awesome .thanks for such description fascinated for visiting rajesthan.lovely pictures mesmerised.

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  2. बहुत ही सुन्दर पोस्ट और मनोरंजक यात्रा वृत्तांत । मनमोहक फ़ोटोज़ से पोस्ट खूबसूरती और बढ़ जाती है । मैं तो आपका प्रशंसक हो गया हूँ

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  3. वाह!मजा आ गया☺

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  4. वाह!मजा आ गया☺

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  5. बहुत ही बढिया तरीके से जानकारी दी है आपने

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  6. बहुत ही बढिया तरीके से जानकारी दी है आपने

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    1. धन्यवाद तारकेश्वर जी

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  7. भारतवर्ष का हर हिस्सा सुन्दर है।

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